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राशन माफियाओं पर सागर कलेक्टर का बड़ा शिकंजा : लाखों के खाद्यान्न का मिला गबन : 5 उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं पर FIR

राशन माफियाओं पर सागर कलेक्टर का बड़ा शिकंजा : लाखों के खाद्यान्न का मिला गबन : 5 उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं पर FIR

• लाखों रुपये के खाद्यान्न गबन का खुलासा, पांच राशन दुकानें निलंबित कर नजदीकी संस्थाओं से की गईं अटैच


तीनबत्ती न्यूज:  2 सितंबर 2026।

सागर: गरीब और जरूरतमंद हितग्राहियों के हक के राशन में गड़बड़ी करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सागर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर खाद्य विभाग द्वारा की गई जांच में शहर की पांच शासकीय उचित मूल्य दुकानों में गंभीर अनियमितताएं और बड़ी मात्रा में खाद्यान्न के अपयोजन का मामला सामने आया है। जांच के बाद संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।


प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पांचों उचित मूल्य दुकानों को निलंबित कर दिया है। वहीं हितग्राहियों को राशन मिलने में परेशानी न हो, इसके लिए इन दुकानों को नजदीकी संस्थाओं से अस्थायी रूप से संबद्ध कर दिया गया है।


जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर हुई जांच


शहर की शासकीय उचित मूल्य दुकानों से हितग्राहियों को खाद्यान्न नहीं मिलने, वितरण में अनियमितता और राशन की कालाबाजारी से संबंधित शिकायतें लगातार जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन और समाचार पत्रों के माध्यम से प्रशासन के सामने आ रही थीं।


शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सहायक आपूर्ति अधिकारी श्रीमती चारू जैन एवं प्रभारी सहायक आपूर्ति अधिकारी श्री अभिषेक मोर के नेतृत्व में गांधीचौक, रामपुरा, शास्त्री वार्ड और शिवाजीनगर क्षेत्र की राशन दुकानों की जांच की गई।


जांच के दौरान दुकानों में स्टॉक का सही संधारण नहीं किया जाना, निर्धारित समय पर दुकान नहीं खोलना, रिकॉर्ड के अनुसार उठाए गए खाद्यान्न और हितग्राहियों को वितरित खाद्यान्न में भारी अंतर तथा दुकानों पर खाद्यान्न का भौतिक रूप से उपलब्ध नहीं होना जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।


लाखों रुपये के खाद्यान्न के अपयोजन का खुलासा


जांच में अलग-अलग राशन दुकानों में बड़ी मात्रा में खाद्यान्न के अपयोजन का मामला सामने आया। विभाग द्वारा दर्ज विवरण के अनुसार—


सुबेदार-01 उचित मूल्य दुकान, कोड 1001046


वर्तमान विक्रेता ध्रुव रजक के स्तर पर 2,236 किलोग्राम खाद्यान्न का अपयोजन, जिसकी कीमत ₹1,45,680 बताई गई है।


पूर्व विक्रेता अतुल तिवारी के स्तर पर 5,60,012 किलोग्राम खाद्यान्न का अपयोजन, जिसकी कीमत ₹15,67,329 बताई गई है।



शास्त्री वार्ड, कोड 1001020

विक्रेता श्रीमती रमा पति अतुल तिवारी एवं सहायक विक्रेता अनुरोध पिता अतुल तिवारी के स्तर पर 47,291 किलोग्राम खाद्यान्न का अपयोजन पाया गया, जिसका मूल्य ₹14,55,230 है।


गांधीचौक वार्ड, कोड 1001039


वर्तमान विक्रेता अनुराग पिता स्व. मदनलाल सोनी के स्तर पर 3,293 किलोग्राम खाद्यान्न का अपयोजन, मूल्य ₹1,04,664.50।


पूर्व विक्रेता अतुल तिवारी पिता स्व. चंद्रबिहारी तिवारी के स्तर पर 24,054 किलोग्राम खाद्यान्न का अपयोजन, मूल्य ₹7,49,500।



रामपुरा वार्ड, कोड 1001057

विक्रेता अतुल तिवारी के स्तर पर 15,544 किलोग्राम खाद्यान्न का अपयोजन पाया गया, जिसकी कीमत ₹4,75,260 है।


शिवाजीनगर वार्ड, कोड 1001007

विक्रेता दीपक पिता सीताराम श्रीवास्तव के स्तर पर 20,362 किलोग्राम खाद्यान्न का अपयोजन सामने आया, जिसकी कीमत ₹6,47,610 बताई गई है।


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BNS और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR

जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं नियंत्रण आदेश की धाराओं के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 316(5) और 318(4) के तहत पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।प्रशासन द्वारा अपयोजित खाद्यान्न की राशि की वसूली की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।


राशन वितरण व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश


जिला प्रशासन ने पांचों उचित मूल्य दुकानों को निलंबित करने के साथ ही उन्हें नजदीकी संस्थाओं से संबद्ध कर दिया है, ताकि संबंधित क्षेत्र के हितग्राहियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।


कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई से राशन वितरण में अनियमितता करने वाले विक्रेताओं में हड़कंप की स्थिति है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि गरीबों के हक के खाद्यान्न में गड़बड़ी या कालाबाजारी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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कलेक्टर प्रतिभा पाल ने खाद्य शाखा का किया औचक निरीक्षण, लंबित प्रकरणों के निराकरण के निर्देश

कलेक्टर ने खाद्य शाखा का किया औचक निरीक्षण, लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश



तीनबत्ती न्यूज, 13 अगस्त 2026

सागर। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित जिला आपूर्ति एवं खाद्य नियंत्रक शाखा का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शाखा में जांच प्रकरणों, उनकी प्रगति और लंबित मामलों की स्थिति की विस्तार से जानकारी ली।

कलेक्टर श्रीमती पाल ने लंबित प्रकरणों को स्वयं देखा और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सभी मामलों का शीघ्र एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जांच प्रकरणों में पेंडेंसी पाए जाने पर उन्होंने कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने दायरा पंजी का अवलोकन किया। उन्होंने पंजी में दर्ज आवेदनों को निकलवाकर उनकी वर्तमान स्थिति और उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी ली। इसके साथ ही खाद्य शाखा द्वारा की गई कार्रवाई के अंतर्गत दर्ज एफआईआर प्रकरणों का भी अवलोकन कर संबंधित मामलों की जानकारी प्राप्त की।

कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि खाद्य एवं आपूर्ति से संबंधित प्रकरणों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। सभी प्रकरणों का नियमानुसार निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए।


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एमपी में एनालॉग पनीर पर लगेगा बैन, सीएम मोहन यादव का फैसला

एमपी में एनालॉग पनीर पर लगेगा बैन, सीएम मोहन यादव ने दिए खाद्य सुरक्षा के सख्त निर्देश


तीनबत्ती न्यूज: 12 अगस्त, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सीएम डॉ. मोहन ने एमपी में बैन किया एनालॉग पनीर

मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर पर बैन लग गया है। इस तरह का पनीर बनाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वे राज्य में प्राकृतिक पनीर को ही प्रोत्साहित करेंगे। एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को हतोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को मीडिया से कहा कि हमने ये निर्णय किया है कि मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री को हतोत्साहित करेंगे। इस पर प्रतिबंध लगाएंगे। देश के अन्य राज्यों में भी इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। हमारे यहां प्राकृतिक दूध के उत्पाद हैं हम प्राकृतिक पनीर बनाएंगे। हम इन उत्पादों के बलबूते पर राज्य की पहचान बनाएंगे। 

बिल्कुल बढ़ावा नहीं देंगे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम दूध का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे चल रहे हैं। एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को हम बढ़ावा नहीं देंगे।सरकार के अनुसार बाजार में दूध से बने पारंपरिक पनीर के स्थान पर सस्ते एनालॉग पनीर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। एनालॉग पनीर में दूध के अलावा वनस्पति तेल, मिल्क पाउडर, प्रोटीन, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

होटल, मिठाई दुकानों और डेयरी में होगी जांच

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें होटल, मिठाई की दुकानों, डेयरी, रेस्टोरेंट और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में जांच अभियान चला सकती हैं। जांच के दौरान एनालॉग पनीर पाए जाने पर नमूने लिए जाएंगे और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को खाद्य पदार्थों की लेबलिंग और उपभोक्ता जागरूकता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।


क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर को आम तौर पर असली पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है। यह पारंपरिक तरीके से केवल दूध को फाड़कर तैयार किए गए पनीर से अलग होता है।

इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में वनस्पति या पाम ऑयल, स्किम्ड मिल्क पाउडर, सोया प्रोटीन, केसिन, स्टार्च, इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। खाद्य उद्योग में इसका इस्तेमाल कुछ फास्ट फूड, फ्रोजन फूड और अन्य तैयार खाद्य पदार्थों में किया जाता है।

असली पनीर और एनालॉग पनीर में अंतर

असली पनीर: दूध से तैयार किया जाता है और इसमें दूध से मिलने वाला प्रोटीन, वसा और कैल्शियम प्रमुख पोषक तत्व होते हैं।

एनालॉग पनीर: दूध के अलावा अन्य वसा और खाद्य सामग्री से तैयार किया जा सकता है। इसकी पोषण संरचना इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करती है।

उपभोक्ताओं को पैकेट पर दिए गए लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि किसी उत्पाद पर “Paneer Analogue”, “Imitation Paneer” या इसी तरह की जानकारी लिखी हो तो उसे पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग समझना चाहिए।


उपभोक्ताओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए?


पनीर खरीदते समय पैकेट पर उत्पाद की सामग्री, लेबल और निर्माता की जानकारी जरूर देखें। खुले में बिकने वाले पनीर की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ताओं को सावधानी बरतनी चाहिए।

सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।



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