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सीएम डॉ.मोहन यादव 7 अक्टूबर को सागर में : वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को करेंगे विमुक्त

सीएम डॉ.मोहन यादव 7 अक्टूबर को सागर में : वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को करेंगे विमुक्त

तीनबत्ती न्यूज:  6 अक्टूबर 2026।

सागर : वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को सागर जिले के प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे दोपहर 12 बजे भोपाल स्थित स्टेट हैंगर से हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर दोपहर 12:55 बजे रहली विधानसभा क्षेत्र के मोहली हेलीपैड पहुंचेंगे। यहां से दोपहर 1:20 बजे कार द्वारा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री यहां चीतों को विमुक्त करने के साथ स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। स्थानीय कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 2:45 बजे कार से मोहली हेलीपैड पहुंचेंगे और दोपहर 2:50 बजे हेलीकॉप्टर से भोपाल के लिए रवाना होंगे।

439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं

कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है।

वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था की गई है। साथ ही क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है।


सागर और बुंदेलखंड में बढ़ेगा वन्यजीव पर्यटन

चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के पहुंचने से होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व


वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।


वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है।


चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब इस अभियान का विस्तार मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक किया जा रहा है।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है।


देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60


5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं।

7 अक्टूबर को कूनो से नर चीता थोलो और मादा चीता CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीते रहेंगे।

वर्तमान में गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक तथा मादा चीते धीरा और सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं।

दो चीतों की विमुक्ति के साथ वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान का नया केंद्र बनेगा। इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि सागर और पूरे बुंदेलखंड में पर्यटन एवं स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व: विस्थापन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश, प्रमुख सचिव (वन) ने की समीक्षा

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व: विस्थापन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश, प्रमुख सचिव (वन) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की समीक्षा

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के गांवों के विस्थापन, पुनर्वास और मुआवजा कार्यों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर प्रतिभा पाल एवं वन-राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित

तीनबत्ती न्यूज: 03 अगस्त 2026

सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले गांवों के विस्थापन कार्य को समयसीमा में पूरा करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को प्रमुख सचिव (वन) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में शेष बचे गांवों के विस्थापन, परिसंपत्तियों के मूल्यांकन, मुआवजा वितरण और पुनर्वास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शेष बची विस्थापन प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए। साथ ही प्रभावित ग्रामीणों को देय मुआवजा, पुनर्वास पैकेज तथा कट-ऑफ डेट के निर्धारण से संबंधित लंबित प्रस्तावों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

रहली और देवरी के गांवों पर विशेष चर्चा

बैठक में तहसील रहली एवं देवरी के अंतर्गत आने वाले प्रभावित गांवों, जिनमें ग्राम मुहली, भरई, पटना मुहली सहित अन्य गांव शामिल हैं, के पुनर्वास, मुआवजा राशि वितरण तथा कट-ऑफ डेट के पुनरीक्षण से जुड़े प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने दिए पारदर्शी कार्रवाई के निर्देश

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में बची हुई परिसंपत्तियों का त्वरित एवं सटीक मूल्यांकन किया जाए। परीक्षण पूर्ण होने के बाद प्रस्तावों को बिना विलंब वरिष्ठ कार्यालय भेजा जाए, ताकि स्वीकृति की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

उन्होंने कहा कि विस्थापन एवं मुआवजा पैकेज निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। पात्र हितग्राहियों की आयु एवं पात्रता का निर्धारण दाखिला पंजी तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर किया जाए, जिससे किसी भी पात्र व्यक्ति का अधिकार प्रभावित न हो।

ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में वन मंडल अधिकारी रजनीश सिंह, भू-अर्जन अधिकारी, एसडीएम देवरी मुनव्वर खान, एसडीएम रहली कुलदीप पाराशर सहित वन विभाग के एसडीओ एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विस्थापन कार्यों की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करते हुए लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण का भरोसा दिलाया।

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