मध्यप्रदेश में लगभग 135 लाख मैट्रिक टन किया जाएगा गेंहू उपार्जित -खाद्य, नागरिक आपूर्ति प्रमुख सचिव श्री किदवई

सोमवार, 25 जनवरी 2021

लोक संस्कृति और लोक कलाओं के पुरोधा डॉ. कपिल तिवारी को पद्मश्री ,बुन्देलखण्ड हुआ गौरान्वित

लोक संस्कृति और लोक कलाओं के पुरोधा डॉ. कपिल तिवारी को पद्मश्री ,बुन्देलखण्ड हुआ गौरान्वित

भोपाल : लोक कलाओं और लोक संस्कृति के पुरोधा, लोककला अकादमी के पूर्व संचालक डॉ. कपिल तिवारी को भारत सरकार द्वारा इस वर्ष के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। डॉ.तिवारी को देश के इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजे जाने पर जिला प्रशासन ने उन्हें शुभकामनाएं और बधाई दी हैं। 

डॉ. तिवारी ने मध्यप्रदेश में लोक कलाओं और लोक कलाकारों के संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्कृति विभाग में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने अविभाजित मध्य प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों से होनहार लोक कलाकारों को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय  मंच प्रदान किया । उनका उत्साह बढ़ाया। लेखन के क्षेत्र में भी डॉ तिवारी काफी सक्रिय रहे हैं। देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनके आलेख अक्सर प्रकाशित होते हैं ।मौलिक चिंतन के धनी  तिवारी जी सागर बुंदेलखंड अंचल के बिरले ऐसे संस्कृति कर्मी और साहित्यकार हैं  ।

डॉ कपिल तिवारी : संक्षिप्त परिचय

• जन्म :-21 मार्च 1962

• स्नात्कोत्तर (हिन्दी), तीन स्वर्ण पदक, डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, 1975

• पी. एच. डी- (हिन्दी) डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, 1979 पूर्व निदेशक, आदिवासी लोक कला एवं बोली अकादमी, संस्कृति परिषद, म.प्र. शासन
(1991 से 2011)

• संस्थापक सम्पादक चौमासा', लोक संस्कृतियों पर आधरित हिन्दी की प्रथम पत्रिका

सम्पादन :- मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखण्ड, बिहार और झारखण्ड के लोकवाचिक के एक लाख से अधिक पृष्ठों का संकलन तथा पचास हजार से अधिक पृष्ठों का 100 से अधिक पुस्तको के रूप में प्रकाशन
* गौंड, भील. मिलाला, कोरकू, बैगा, कोल, सहरिया, और भारिया समुदायों का हिन्दी में लोक संग्रह
* गोंड़ी, भीली, मालवी, निमाड़ी, बुन्देलखंडी, बघेली, भोजपुरी, अवधी, राजस्थानी, कुमोऊनी, मैथिली, और छत्तीसगढ़ी आख्यानों, गाथाओं, कथाओं, लोकगीतों, मुहावरों, गीतों, पहेलियों कहायतों शिल्पों, देवलोक आदि का संकलन और प्रकाशन
• पूरे भारत की शिल्प परम्पराओं पर आधारित मेलों का आयोजन
* भारत की पारम्परिक बुनाई और रंगाई की लोक विधाओं का सर्वेक्षण और हिन्दी में प्रकाशन

शब्दकोश :- मालवी, निमाडी, और बघेली के हिन्दी शब्द कोशों का सम्पादन और प्रकाशन
लोकवान :* कबीर की छाप के 1000 लोक पदों का संग्रह और प्रकाशन हिन्दीभाषी क्षेत्रों की लोकपरम्परा में रामकथा पर केन्द्रित लोकगीतों का संग्रह।

• दायित्व

* सदस्य, सलाहाकार समिति, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली
* सदस्य, संगीत नाटक अकादमी, मार्गदर्शक मंडल
* सदस्य, सलाहाकार समिति. यूनेस्को अंतर्राष्ट्रीय अमूर्त कला संरक्षण कार्यक्रम




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