दानवीर , सागर विवि के संस्थापक डॉ हरि सिंह गौर की जयंती,26 नवम्बर ।

सोमवार, 1 नवंबर 2021

दीपावली 2021 : धनतेरस से शुरू होगा दीवाली पर्व

दीपावली 2021 : धनतेरस से शुरू होगा दीवाली पर्व 



धनतेरस से प्रारंभ होने जा रहा है दीपावली पर्व । इस साल श्री महालक्ष्मी पूजन 4 नवंबर सन 2021 वार गुरुवार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पर्व का सनातन संस्कृति में अत्यधिक महत्व है क्योंकि मां भगवती महालक्ष्मी का यह पावन पर्व धनधान्य, ऐश्वर्य,आयु ,आरोग्य, संपदा एवं वैभव प्रदान करने वाला होता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को अर्धरात्रि के समय मां भगवती लक्ष्मी महारानी सदगृहस्थों के घर में जहां-तहां विचरण करती हैं। इसलिए सभी को अपने घर को सब प्रकार से स्वच्छ, शुद्ध और सुशोभित करके दीप मालिका प्रज्वलित करने पर महालक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं तथा वहां स्थाई रूप से निवास करती हैं। यह अमावस्या प्रदोष काल एवं अर्धरात्रि व्यापिनी हो तो विशेष रूप से शुभ फलदायक होती है। स्वर्ण पदक प्राप्त ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित गणेश शर्मा ने बताया की इस वर्ष कार्तिक अमावस 4 नवंबर गुरुवार को प्रातः सूर्योदय से अर्धरात्रि बाद 2:44 तक व्याप्त रहेगी। दीपावली स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग कालीन अपराहन सायँ प्रदोष निशीथ ,महानिशीथ व्यापिनी अमावस्या युक्त होने से विशेषता प्रशस्त एवं पुणय प्रदायक फल देने वाली रहेगी। प्रातः 7:41 के बाद स्वाति नक्षत्र चर, चल संज्ञक होने से वाहन लेनदेन, उद्योग कर्म, दुकानदारी, चित्रकारी ,शिक्षा कार्य ,स्कूल संचालन ,श्रृंगार प्रसाधन ,वस्त्र, आभूषण कार्य एवं अन्य कार्य करने के लिए भी शुभ माना जाएगा।

यह करे दीपावली के दिन  

इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी लोगों को प्रातः कृतयों से निवृत्त होकर पित्रगण तथा देवताओं का पूजन करना चाहिए। संभव हो तो दूध, दही और शुद्ध देसी घी से पितरों का पारण श्राद्ध करना चाहिए। यदि यह संभव ना तो दिन भर उपवास कर गोधूलि बेला में अथवा वृषभ सिंह आदि स्थिर लग्न में श्री गणेश, महालक्ष्मी ,रिद्धि सिद्धि ,इंद्र ,वरुण ,कुबेर आदि शक्तियों सहित ब्रह्मा ,विष्णु, महेश, कुलदेवता ,स्थान देवता, एवं सूर्यादि समस्त ग्रह नक्षत्र मंडल का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए ।इसके अनंतर महाकाली का दवात के रूप में महासरस्वती का कलम के रूप में बही के रूप में तथा कुबेर का तुला के रूप में सविधि पूजन करना चाहिए। इसी समय दीप पूजन कर यमराज तथा पितरों के निमित्त से ससंकल्प दीप दान करना चाहिए ।तदुपरांत निशीथ आदि शुभ मुहूर्त में मंत्र जप, यंत्र सिद्धि आदि अनुष्ठान संपादित करने चाहिए ।दीपावली वास्तव में पांच पर्वों का महोत्सव माना गया है जिसकी शुरुआत कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी अर्थात धनतेरस से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल द्वितीया अर्थात भैया दूज तक रहती है। दीपावली के पर्व पर धन की प्राप्ति के लिए धन की अधिष्ठात्री धनदा भगवती लक्ष्मी का समारोह पूर्वक एवं पवित्र स्थान पर आटा हल्दी अक्षत एवं पुष्प आदि से अष्टदल कमल बनाकर श्री लक्ष्मी का आव्हान स्थापन करके देवों की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
दीपावली पूजन में प्रदोष निशीथ एवं महानिशीथ काल के अतिरिक्त चौघड़िया मुहूर्त भी पूजन बहीखाता, पूजन कुबेर, पूजा जप आदि अनुष्ठान की दृष्टि से विशेष प्रशस्त एवं शुभ माने जाते हैं।

चौघड़िया मुहूर्त का विवरण:

शुभ चौघड़िया सुबह 6:36 से लेकर 07:58 तक इसके पश्चात चर चौघड़िया सुबह 10:42 से 12:04 तक लाभ की चौघड़िया 12:04 से लेकर 1:26 तक तथा अमृत की चौघड़िया 1:26 से 2:48 तक एवं पुनः शुभ की चौघड़िया 4:10 से लेकर 5 बज के 32 मिनट तक विद्यमान रहेगी।
इसके पश्चात रात्रि की चौघड़िया 5:32 से 7:11 तक अमृत की चौघड़िया तथा 7:11 से 8:49 तक चर की चौघड़िया विद्यमान रहेगी ।इन चौघड़िया कालों में भी मां भगवती लक्ष्मी ,भगवान गणेश ,कुबेर आदि का पूजन करना शुभ फलदायक होता है
विशेषकर रात्रि 8:52 से लेकर मध्य रात्रि 12:05 तक शुभ चौघड़िया नहीं है इस कारण से विशेष पूजन आदि 8:52 से पहले ही कर लेना ज्यादा शुभ फलदायक रहेगा ।
प्रदोष काल 4 नवंबर 2021 को शाम 5:32 से लेकर 8:12 तक प्रदोष काल व्याप्त रहेगा एवं शाम को 18:06 से लेकर 20:02 तक वृषभ लग्न स्थिर लग्न विशेष प्रशस्त होगा। प्रदोष काल में वृषभ लग्न स्वाति नक्षत्र तुला का चंद्रमा तथा सूर्यास्त के बाद पहले अमृत की चौघड़िया चर की चौघड़िया मे श्री गणेश लक्ष्मी पूजन प्रारंभ कर लेना चाहिए। अमृत व चर की चौघड़िया रहने से इस योग में ही दीपदान श्री महालक्ष्मी पूजन ,कुबेर ,गणेश बहीखाता पूजन , धार्मिक एवं गृह स्थलों पर दीप प्रज्वलित करना ब्राह्मणों तथा निआश्रितों को भेटँ मिष्ठान आदि बांटना शुभ होगा।
महा निशीथ काल रात्रि 10:09 से लेकर मध्य रात्रि उपरांत 1:30 तक रहेगा। इस समयावधि में रात्रि 12:05 तक काल की चौघड़िया अशुभ व्याप्त रहेगी। अतः इसके बाद अर्थात रात्रि 12:05 से लेकर रात्रि 1:43 तक का समय लाभ की चौघड़िया होने के कारण अत्यंत शुभ फलदायक रहेगा इस अवधि में मां भगवती काली की उपासना ,तंत्र क्रियाएं, विशेष कामय प्रयोग, तंत्र अनुष्ठान, साधनाएं एवं यज्ञ आदि किए जाते हैं रात्रि 12:35 से सिंह लग्न भी विशेष प्रशस्त एवं शुभ फलदायक रहेगा।
ये हैं दिन के लगन
उद्योग धंधों, कार्य व्यवसाय, दुकान ,फैक्ट्री आदि के लिए धनु लग्न प्रातः 9:51 से लेकर दोपहर 11:55 तक विद्यमान रहेगा ।उस समय लग्न में लाभेश शुक्र है और गुरु धन स्थान में धनेश शनि के साथ होने से इस वर्ष के मध्य मे धन वृद्धि कारक होगा। इसके पश्चात दोपहर 11:00 बज के 55 मिनट से लेकर 1:30 तक मकर लग्न विद्यमान रहेगा ।इसमें भी पूजन किया जा सकता है ।लेकिन 1:33 से 3:01 के बीच में कुंभ लग्न विद्यमान रहेगा इस समय पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि कुंभ लग्न का त्याग कर सभी लग्न शुभ मानी जाती है ।इसके पश्चात 3:01 से लेकर 4:27 तक मीन लग्न भी शुभ फलदायक रहेगा। इसमें भी महालक्ष्मी गणेश आदि पूजन करना अत्यंत शुभ फलदायक रहेगा।
यह है रात्रि के लगन:
वृषभ लग्न रात्रि 6:02 से लेकर 7:58 तक विद्यमान रहेगा तथा मिथुन लग्न 7:58 से लेकर रात्रि 10:12 तक रहेगा विशेषकर वृषभ लग्न और मिथुन लग्न महालक्ष्मी का पूजन कर लेना चाहिए विशेष तौर पर 8:52 से पूर्व क्योंकि उसके पश्चात रोग की चौघड़िया प्रारंभ हो जाएगी और यदि इस काल में नहीं कर पाए तो रात्रि 12:04 से लेकर 1:43 के बीच में लाभ की चौघड़िया होगी तथा इसी समय सिंह लग्न रात्रि बाजार 12:35 से प्रारंभ होगा इस कारण इस समय महालक्ष्मी का पूजन करना महा निशीथकाल होने के कारण अत्यंत शुभ फल प्रदाता एवं भाग्य उन्नति कारक एवं वर्षभर धनधान्य ऐश्वर्यादी फल देने वाला रहेगा। क्योंकि महालक्ष्मी का महानिशीथ कॉल मे करना अत्यंत शुभ फलदायक होता है।


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