बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

स्वदेशी ज्ञान और प्रामाणिक प्रथाएं पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, राज्यसभा सदस्य डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे करेंगे उद्घाटन

स्वदेशी ज्ञान और प्रामाणिक प्रथाएं पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, राज्यसभा सदस्य डॉ. विनय  सहस्त्रबुद्धे करेंगे उद्घाटन

सागर। डॉ हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि के स्वदेशी ज्ञान अध्ययन केन्द्र एवं मानव विज्ञान विभाग के
संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन  "स्वदेशी ज्ञान एवं प्रामाणिक प्रथाये   विषय पर तथा पारम्परिक चिकित्सा पद्धति शिविर का आयोजन  27 से 29 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्घाटन श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिन्धिया स्वर्ण जयन्ती सभागार में प्रातः 10.00 बजे से मुख्य अतिथि डॉ. विनय प्रभाकर सहस्त्रबुद्धे, अध्यक्ष, भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, भारत एवं राज्यसभा सदस्य तथा अतिथि  सांसद  राज बहादुर सिंह, एवं  शैलेन्द्र जैन, विधायक के द्वारा सम्पन्न होगा।  जिसकी अध्यक्षता कुलपति
प्रो. राघवेन्द्र पी. तिवारी करेंगे।
इस सम्बंध में विवि के कुलपति प्रो आर पी तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय में वैदिक संस्कृति के अन्तर्गत अन्य विषयों पर भी अनुसंधान किया जा रहा है जिसमें वैदिक गणित भारत के गणिक सीखने की पुरानी विधा मानी गई है जिसका सम्पूर्ण ज्ञान 16 सूत्रों में समाया हुआ है। यह गणित को हल करने की सबसे सरल विधि है जिसे अथर्व वेद एवं अन्य वेदों से निकाला गया है। इस प्रकार के प्रमुखविषयों पर अध्ययन करने वाला देश भर के केन्द्रीय विश्वविद्यालय में सागर पहला विश्वविद्यालय बन गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विगत दिनों वेदान्त से जुड़े ऋचाओं, सूत्रों एवं परम्पराओं पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान किये गए हैं जिसके विद्वानों के उद्बोधनों को संग्रहीत करके प्रकाशित किया जायेगा।
देश विदेश के विद्वान आएंगे
समन्वयक एवं अध्ययन केन्द्र के प्रभारी प्रो. काशी कैलाश नाथ शर्मा ने बताया कि इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में न सिर्फ देश बल्कि
विदेश के विद्वान आयेंगे। विदेश के पारम्परिक चिकित्सक श्रीलंका के अशोक करूणारथना एवं ववेला अप्पूहामलेज, युगांडा के डॉ. यहाया सेकेज्ञा तथा दक्षिण अफ्रीका के हसन ओ. काया शामिल हो रहे हैं। वॉटरमैन ऑफ इंडिया के नाम से जाने जाने वाले पद्मश्री श्री राजेन्द्र सिंह राजस्थान, प्रो. के. सी. मल्होत्रा, नोएडा, प्रो. वृषभ प्रसाद जैन, वर्धा, महाराष्ट्र,एम.एल.नायक, रायपुर, छत्तीसगढ़, प्रो. जी. हरिमूर्ति, बैंगलौर, तमिलनाडु, प्रो. सी.एस.एस. ठाकुर, जबलपुर, मध्यप्रदेश, प्रो. गौतम क्षत्रिय नई दिल्ली, प्रो, अजीत कुमार दास, सिलचर, असम, प्रो. प्रेमानन्द पण्डा, सम्बलपुर, उड़ीसा, प्रो. बी .के .तिवारी,शिलॉग, मेघालय, प्रो. अभिक घोष, चण्डीगढ. पंजाब, डॉ. आर.एन. शर्मा, अम्बिकापुर , छत्तीसगढ़ एवं उत्कल
सांस्कृतिक  विश्वविद्यालय, भुबनेश्वर के कुलपति प्रो. बी. के. त्रिपाठी का व्याख्यान होगा। इनके उल्लेखनीय कार्योंके लिए इनके साथ-साथ विश्वविद्यालय के प्रो. एस. के. व्यास, प्रो. संजय कुमार जैन को सम्मानित किया जायेगा। इस तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 45 विद्वानों ने अपनी सहमति दर्शायी है। सम्पूर्ण तकनीक सत्र पुस्तकालय सभागार में प्रतिदिन प्रातः 9.30 बजे से 6.00 बजे के बीच सम्पन्न होगा।
चिकित्सा शिविर भी लगेगा
इसके साथ-साथ देश एवं विदेश के लगभग 55 पारम्परिक चिकित्सकों द्वारा विश्वविद्यालय के गौरसमाधि प्रांगण में तीन दिवसीय शिविर का आयोजन जनमानस के लिए किया जा रहा है जिसका उद्घाटन 27फरवरी 2020 को 12.30 बजे होगा। उसके पश्चात् यह आगामी दिवसों के लिए प्रातः 8.00 बजे से सांय 5.30 बजे तक खुला रहेगा। पूर्व में भी इस केन्द्र द्वारा तीन बार
विश्वविद्यालय प्रांगण में तीन बार, भाग्योदय अस्पताल में एक बार तथा चकराघाट में एक बार लगाया जा चुका है। जिसकी जनमानस द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गई थी तथा उनके द्वारा पुनः इस प्रकार का आयोजन करने का
अनुरोध किया गया था। इस शिविर में विभिन्न रोगों का उपचार पारम्परिक चिकित्सा पद्धति से इन चिकित्सकोंद्वारा किया जायेगा। इस शिविर में आँखों की सफाई करने वाले पारम्परिक चिकित्सक भी आ रहे हैं। ये चिकित्सक पूर्व के शिविरों में काफी लोकप्रिय हुए थे। इनकी पारम्परिक चिकित्सा पद्धति को भारत सरकार केआयुष मंत्रालय द्वारा अनुमोदित कर स्थानीय पारम्परिक चिकित्सकों को पुरूत्साहित किया जा रहा है। 

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