शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

दो हजार की रिश्वत लेने वाले सहायक पुलिस उप निरीक्षक को चार साल की सजा

 दो हजार की रिश्वत लेने वाले  सहायक उप निरीक्षक को चार साल की सजा
सागर। न्यायालय- विषेष न्यायाधीष (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) श्री रामबिलास गुप्ता सागर की  अदालत ने आरोपी स.उ.निरी. नाथूराम अहिरवार पिता स्व. बी.एल. अहिरवार उम्र 57 साल निवासी रविदास धर्मषाला के सामने राजमहल के पास कोतवाली टीकमगढ़ जिला टीकमगढ़ को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 13(1)डी सहपठित धारा 13(2)में दोषी पाते हुए  04-04 वर्ष का सश्रम  कारावास एवं 10000-10000 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया। म.प्र. शासन की ओर से पैरवी विषेष लोक अभियोजक श्री आर. के. पटेल ने की।

अभियोजन मीडिया प्रभारी एडीपीओ सौरभ डिम्हा ने बताया कि दिनांक 06.06.2016 को आवेदक जीतेष राय ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर के समक्ष उपस्थित होकर षिकायत की थी कि दिनांक 31.05.2016 को आवेदक के बडे भाई जयकुमार राय के विरूद्ध शराब बेचने का झूठा केस बनाबा कर उसे जेल भेज दिया है। भाई को छुडवाने के एवज में सउनि नाथूराम के द्वारा 25000 रूप्ये लाने को कहा गया था, 18000 रूप्ये दे दिये है तो भी भाई को नही छोड़ा। दिनांक 05.06.2016 को नाथूराम से आवेदक ने सम्पर्क किया तो उसके द्वारा 10000 रूप्ये की मांग की गयी। बाद में 2000 रूप्ये दिनांक 08.06.2016 को देना तय हुआ। आवेदक आरोपी को रिष्वत नही देना चाहता था बल्कि उसे रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ पकडवाना चाहता था आवेदक की षिकायत का सत्यापन कराया गया आरोपी की  बार्ता रिकार्ड की गयी 2000 लेने के लिए सहमत हुआ, ट्रेप कार्यवाही आयोजित की गयी। दिनांक 08.06.2016 को आरोपी नाथूराम अहिरवार आवेदक जीतेष राय से 2000 रूपये की रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ पकडा गया। उक्त राषि आरोपी के कब्जे से जप्त की गयी। लोकायुक्त पुलिस सागर द्वारा विवेचना उपरांत उक्त मामले का अभियोग पत्र विषेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण सागर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अभियोजन द्वारा न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों को सूक्ष्मता से प्रस्तुत किया गया। मामले में आयी साक्ष्य के आधार पर एवं अभियोजन के तर्को से सहमत होकर विषेष न्यायाधीष (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) श्री राम विलास गुप्ता सागर की  अदालत आरोपी स.उ.निरी. नाथूराम अहिरवार को  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 13(1)डी सहपठित धारा 13(2)में दोषी पाते हुए  04-04 वर्ष का सश्रम  कारावास एवं 10000-10000 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया।




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