गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

हनुमान जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजय वर्गीय अन्न ग्रहण करेंगे,20 साल बाद

हनुमान जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजय वर्गीय अन्न ग्रहण करेंगे,20 साल बाद

दौर। इंदौर में  पितृ पर्वत पर विराजित पितरेश्वर हनुमान मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है। शुक्रवार को पूर्णाहुति है । जिसमें शामिल होने के लिए वृंदावन से महामंडलेश्वर गुरुशरणानंद और अवधेशानंद गिरी आदि संत महात्मा आ रहे हैं। उनके हाथों 20 साल बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय अन्न ग्रहण करेंगे।पितृ पर्वत पर 72 फीट की अष्टधातु की भगवान हनुमान की प्रतिमा विराजित की गई है। जिस पर करीब 15 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

वर्षों चला पितृ पर्वत पर प्रतिमा का निर्माण

वर्षों से पितृ पर्वत पर हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करने का काम किया जा रहा था। 72 फीट ऊंची अष्ट धातु की ये प्रतिमा विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा है। जिसका प्राण प्रतिष्ठा समारोह भी धूमधाम से चल रहा है। 24 फरवरी से शुरू हुए आयोजन की शुक्रवार को पूर्णाहुति होगी। महोत्सव में शामिल होने के लिए आज शाम 7 बजे महामंडलेश्वर जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज आएंगे। शुक्रवार को वृंदावन के संत महामंडलेश्वर गुरुशरणानंद महाराज व मुरारी बापू हनुमानजी की आराधना कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। इस बीच में गुरुशरणानंद महाराज के हाथों भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विजयवर्गीय अन्न ग्रहण करेंगे। वे करीब दो दशक से अन्न नहीं खाते हैं।
संकल्प लिया था पितृ दोष निवारण का
बीस साल पहले इंदौर के मेयर  कैलाश विजयवर्गीय निर्वाचित हुए थे । उसी समय उन्हें किसी महात्मा ने बता दिया कि शहर में पितृ दोष है । जिससे इंदौर का विकास रुका हुआ है. इसके निवारण के लिए पितृ पर्वत पर भगवान हनुमान  की प्रतिमा स्थापित कराने से ये दोष दूर हो जाएगा और तभी उन्होंने ये संकल्प ले लिया कि वे पितृ पर्वत पर हनुमान की सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित कराएंगे और जब तक काम पूरा नहीं हो जाता तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।
 पितृ पर्वत पर हनुमानजी की प्रतिमा विराजित करने का संकल्प लिया था ।जिसके बाद से अन्न त्याग दिया था। तब से वे गेहंू, चावल, मक्का, बाजरा, ज्वार सहित दालों को छोड़ दिया था। वे मोरधन, राजगिरा, साबूदाना और फल खाते थे। मजेदार बात ये है कि विजयवर्गीय के अन्न त्यागने के बाद उनकी पत्नी आशा विजयवर्गीय ने मोरधन के 20 प्रकार के व्यंजन बनाना सीख लिया। बाद में परिवार की अन्य महिलाएं भी इस प्रकार के व्यंजन बनाना सीख गईं। इंदौर से बाहर रहने की स्थिति में विजयवर्गीय सब्जी व फल पर ही आश्रित रहते थे।
सात साल में बनी प्रतिमा
पिछले बीस साल में करीब एक लाख पेड़ यहां पर लगाए गए. इसके बाद भगवान हनुमान की अष्टधातु की प्रतिमा बनना शुरू हुई और ग्वालियर के 125 कारीगरों ने 7 साल में इस प्रतिमा को तैयार किया, जो फरवरी 2020 में स्थापित हो पाई है. इसका प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 24 फरवरी से चल रहा है, जो कि 3 मार्च खत्‍म होगा. यही नहीं, उस दिन नगर भोज का आयोजन किया गया है

 

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