सागर के बाल नवाचारकर्ता अर्जुन उपाध्याय ने बनाया ‘Impact OS’, बेंगलुरु में मिला ‘यंग इनोवेटर’ सम्मान
• पानी की गुणवत्ता, वायु प्रदूषण, मौसम और जर्जर इमारतों की जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की पहल
तीनबत्ती न्यूज:15 अक्टूबर, 2026
सागर। आर्मी पब्लिक स्कूल, सागर में कक्षा छठवीं के छात्र अर्जुन उपाध्याय ने तकनीक के रचनात्मक उपयोग से शहरी समस्याओं के समाधान की दिशा में अभिनव पहल की है। अर्जुन ने ‘Impact OS’ नामक वेब पोर्टल एवं ऐप विकसित किया है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य पानी की गुणवत्ता, वायु गुणवत्ता, मौसम और जर्जर इमारतों सहित विभिन्न शहरी सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है।
अर्जुन के इस नवाचार को बेंगलुरु में आयोजित हैक फेस्ट में सराहना मिली, जहां उन्हें ‘यंग इनोवेटर’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
AI की मदद से अलग-अलग स्रोतों की जानकारी एक डैशबोर्ड पर
अर्जुन के अनुसार, इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और दिल्ली में जर्जर इमारतों से जुड़ी घटनाओं ने उन्हें इस परियोजना पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से विभिन्न सार्वजनिक सूचना स्रोतों से जानकारी को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की परिकल्पना की।
‘Impact OS’ में नगर निगमों, स्थानीय प्रशासन, जल परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा मौसम और वायु गुणवत्ता से संबंधित सार्वजनिक पोर्टलों से उपलब्ध जानकारी को एकीकृत डैशबोर्ड के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को अपने आसपास के पर्यावरण और शहरी सुविधाओं से जुड़ी उपयोगी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।
हवा, मौसम से लेकर जर्जर भवनों तक की जानकारी
‘Impact OS’ की परिकल्पना के अनुसार उपयोगकर्ता अपने आसपास के क्षेत्र में पानी और हवा की गुणवत्ता, मौसम तथा अन्य शहरी सुविधाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इसके साथ ही नगर निकायों द्वारा की जाने वाली जल आपूर्ति, ऊर्जा संसाधनों, बिजली एवं सौर ऊर्जा के उपयोग और पौधरोपण से संबंधित आंकड़ों को भी एक स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है।
प्लेटफॉर्म में जर्जर भवनों से संबंधित जानकारी और अलर्ट की सुविधा भी प्रस्तावित है। उदाहरण के लिए, यदि किसी नगर निकाय द्वारा किसी जर्जर भवन के संबंध में नोटिस जारी किया जाता है, तो उससे जुड़ी जानकारी उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है।
पिता के पुराने लैपटॉप से शुरू हुआ तकनीक का सफर
अर्जुन की तकनीकी यात्रा महज आठ वर्ष की उम्र में शुरू हुई। उनके पिता ने उन्हें अपना पुराना लैपटॉप दिया था। लैपटॉप में सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के प्रयास के दौरान उनकी कंप्यूटर और तकनीक में रुचि बढ़ी।
इसके बाद अर्जुन ने YouTube वीडियो के माध्यम से प्रोग्रामिंग और कोडिंग सीखना शुरू किया। स्कूल की एक प्रतियोगिता के लिए ऐप बनाने के दौरान मिले प्रोत्साहन ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
लगभग आठ महीने की मेहनत और स्कूल के शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने ‘Impact OS’ विकसित किया। इस परियोजना को और अधिक उन्नत एवं उपयोगी बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उनके सहपाठी अर्णव निरंजन भी इस प्रयास में सहयोग कर रहे हैं।
वैज्ञानिक परिवार से मिला प्रोत्साहन
अर्जुन के पिता डॉ. चंद्रमा प्रकाश उपाध्याय डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी माता डॉ. देवांशी उपाध्याय DST वुमन साइंटिस्ट हैं।
अर्जुन ने अपने विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के कारण ही इस नवाचार को विकसित करना और आगे बढ़ाना संभव हो पाया।
Google Play Store पर लॉन्च करने की तैयारी
अर्जुन अब ‘Impact OS’ ऐप को Google Play Store पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहे हैं। उनका यह प्रयास बताता है कि जिज्ञासा, निरंतर सीखने की इच्छा और तकनीक के रचनात्मक उपयोग से विद्यार्थी भी समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर सकते हैं।
‘Impact OS’ इसी सोच का परिणाम है, जिसमें शहरी सुविधाओं और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।







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