रविवार, 15 दिसंबर 2019

मनुष्यता को बचाने में साहित्य की सृजनशीलता महत्वपूर्ण- कमिश्नरआनंद शर्मा

मनुष्यता को बचाने में साहित्य की सृजनशीलता महत्वपूर्ण- कमिश्नरआनंद शर्मा
डॉ राजेश दुबे की कृतियों का विमोचन 
सागर।  श्यामलम् संस्था के तत्वावधान में कवि कथाकार डॉ राजेश दुबे की दो काव्य कृतियों "गांव से लौटते हुए" एवं व्यंग्य संग्रह "नागफनी" का विमोचन हुआ। इस अवसर पर  सागर संभाग के कमिश्नर आनंद शर्मा ने कहा कि व्यंग्य लेखन समाज की विषमताओं की परत- दर- परत तीक्ष्ण बाणों से उकेरती रचना से समाज को स्पंदित कर देने की क्षमता रखना रखता है। व्यंग्य हो या कविता सामाजिक जीवन मूल्यों की रक्षा करने की ताकत देता है। साहित्य सृजन मनुष्यता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निर्मित करता है।
समाज की जड़ता को खत्म करता है साहित्य:विधायक शेलेन्द्र जैन
 सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि साहित्य समाज की जड़ता को समाप्त करता है ।राजनीति हो या समाज का कोई पक्ष हो, उसका रास्ता साहित्य से होकर ही जाता है। आदि काल से ही साहित्य की ताकतवर आधारशिला समाज को जागृत करती रही है। व्यंग्यकार डॉ. सुरेश आचार्य ने कहा की हास्य- व्यंग्य जीवन के दुखों को दूर करता है।सुख-दुख से परे आनंद की अनुभूति कराता है। देश के व्यंग्य पुरोधाओं ने अपनी रचना शीलता से समाज को,देश को झकझोरने और सही रास्ते पर चलने के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। साहित्य सृजन समाज की संवेदनहीनता को समाप्त कर चेतना संपन्न बनाता है।
 गीतकार कवि डॉ.श्याम मनोहर सीरोठिया ने काव्य संग्रह "गांव से लौटते हुए" पर समीक्षात्मक आलेख में कविता का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए कहा कि कविता के संसार में उक्त संग्रह जीवन के अनुभवों के साथ भाव- जगत और सत्य के जगत में चर्चित होगा। व्यंग संग्रह "नागफनी" पर विस्तारपूर्वक दृष्टि डालते हुए कवयित्री लेखिका डॉ. चंचला दवे ने संग्रह की उपयोगिता और उपादेयता पर सार्थक और प्रभावी चर्चा की। लेखकीय वक्तव्य में डॉ. राजेश दुबे ने कहा कि प्रशासनिक जीवन की व्यवस्थाओं के बावजूद हिंदी साहित्य के प्रति गहरी रुचि से काव्य रचना और व्यंग्य संग्रह का पुस्तकाकार रूप पाठक समाज के सामने आना मेरी रचना शीलता को सार्थक करता है।
कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के पूजन- अर्चन पश्चात् प्रसिद्ध बुंदेली गायक शिवरतन यादव द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथि स्वागत कुंदन पाराशर,आर.के. तिवारी,डॉ.वर्षा सिंह,हरीसिंह ठाकुर,रमाकांत मिश्र तथा डॉ.राजेश दुबे के परिजनों द्वारा किया गया। इस अवसर पर लेखक डॉ. राजेश दुबे का अभिनंदन भी किया गया।कवि डॉ. नलिन जैन ने अभिनंदन कविता का वाचन किया। आयोजक संस्था श्यामलम् के अध्यक्ष उमाकांत मिश्र ने स्वागत उद्बोधन दिया। साहित्यकार डॉ.महेश तिवारी ने स्तरीय संचालन किया तथा श्यामलम् के सह सचिव संतोष पाठक ने आभार माना। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सागर नगर के प्रबुद्ध नागरिकों तथा कवियों, साहित्यकारों, लेखकों की उपस्थिति विशेष रुप से उल्लेखनीय रही।

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