गुरुवार, 12 मई 2022

सँस्कृत के मर्मज्ञ विद्वान महामहोपाध्याय प्रो .भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ,वागीश शास्त्रीजी का निधन★ वागीश जी की सागर है जन्मस्थली★ पीएम मोदी , सीएम शिवराज सिंह, मंत्री भूपेन्द्र सिंह सहित अनेक विद्वतजनो ने दी श्रद्धांजलि

सँस्कृत के मर्मज्ञ विद्वान महामहोपाध्याय प्रो .भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ,वागीश शास्त्रीजी का निधन
★ वागीश जी की सागर है जन्मस्थली
★ पीएम मोदी , सीएम शिवराज सिंह, मंत्री भूपेन्द्र सिंह सहित अनेक विद्वतजनो ने दी श्रद्धांजलि

सागर। पद्मश्री योग, तंत्र विद्या के मर्मज्ञ विद्वान प्रो .भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री, जी का बुधवार की रात को वाराणसी में  निधन हो गया है। 88 वर्षीय वागीश शास्त्री पिछले कई दिनो काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही संस्कृत जगत में शोक की लहर दौड़ गई I उनके निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी ,यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ,एमपी के सीएम शिवराजसिंह, मंत्री भूपेन्द्र सिंह आदि ने शोक जताया है। 


वागीश जी की जन्मस्थली है सागर का बिलैया गांव, गांववालों ने दी श्रद्धांजलि

संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय  अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक व प्रोफेसर वागीश शास्त्री का एमपी से सीधा नाता है। उनकी जन्मस्थली सागर जिले के खुरई का बिलैया ग्राम है। उनका जन्म 24 जुलाई 1934  को हुआ था।
उनकी आरम्भिक शिक्षा सागर में सँस्कृत विद्यालय में हुई। इसके बाद बनारस उनकी कर्मस्थली बन गया। डॉ भागीरथ त्रिपाठी के भतीजे  ब्रिजेश त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने बनारस में यज्ञोपवीत के साथ गायत्री मंत्र की गुरु दीक्षा लेकर डॉ वागीश को ही अपना गुरु बनाया था और जीवन पर्यंत उनका मार्गदर्शन ही पथप्रदर्शक रहेगा।उन्होंने बताया कि  गाँव मे व परिवार में वह भक्तराम के नाम से विख्यात रहे। उनके बड़े भाई पण्डित नेतराम तिवारी ने बचपन की याद करते हुए बताया कि भक्तराम बचपन से मेघावी थे और जब सारे बच्चे खेलते थे तो वह गाँव के खलिहान (गल्ले)में योग मुद्रा में तल्लीन होकर आध्यात्मिक लगन में जुड़े रहते थे।
हम सबके प्रिय वागीश जी  बिलैया गाँव मे जन्मे पले बढ़े पद्म श्री वागीश जी को आज पूरा गाँव भाव विह्ल होकर विनम्र श्रंद्धांजलि दे रहा है।
अनेक सम्मानों से नवाजे गए शास्त्री जी

संस्कृत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले प्रो. वागीश शास्त्री को वर्ष 2018 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया था। उन्होंने 1959 में वाराणसी के टीकमणि संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत प्राध्यापक के रूप में अपने अध्यापकीय जीवन की शुरुआत की थी । इसके बाद वह संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में अनुसंधान संस्थान के निदेशक व प्रोफेसर के पद पर 1970 में नियुक्त हुए और 1996 तक विश्वविद्यालय में कार्यरत रहे।


वागीश शास्त्री ने 1983 में बाग्योगचेतनापीठम नामक संस्था की स्थापना की थी। इस संस्था के माध्यम से वह सरल विधि से बिना रटे पाणिनी व्याकरण का ज्ञान देते थे । प्रो. शास्त्री से ज्ञान अर्जन के लिए देश-विदेश से लोग उनके पास आते रहते थे। कई विदेशी शिष्य भी बने।

उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सर्टिफिकेट आफ मेरिट सम्मान प्रदान किया जा चुका है। 2014 में प्रदेश सरकार की ओर से यशभारती सम्मान मिला था और 2014 में ही संस्कृत संस्थान ने विश्व भारती सम्मान दिया था। 2017 में दिल्ली संस्कृत अकादमी ने महर्षि वेद व्यास सम्मान से सम्मानित किया। इस क्रम में वर्ष 1993 में उन्हें अमेरिका ने सर्टिफिकेट आफ मेरिट गोल्ड आफ आनर से सम्मानित किया गया था।प्रो. शास्त्री को राजस्थान संस्कृत अकादमी से बाणभट्ट पुरस्कार, काशी पंडित परिषद की ओर महामहोपाध्याय सहित अन्य पुरस्कार व अलंकार से नवाजा जा चुका है। प्रो. शास्त्री की अब तक चार सौ से भी अधिक संस्कृत शोधलेख व 55 से अधिक मौलिक ग्रन्थ प्रकाशित हो चुकी हैं। 


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संस्कृत के प्रकांड विद्वान प्रो.  त्रिपाठी के निधन पर शोक व्यक्त किया

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने संस्कृत के प्रकांड विद्वान  पद्म श्री प्रोफेसर भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी  'वागीश शास्त्री' के निधन पर शोक व्यक्त किया है । स्व त्रिपाठी सागर जिले के निवासी थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी संदेश में  कहा है कि यह दुखद समाचार है । प्रोफेसर त्रिपाठी सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक दौर में संस्कृत की उपयोगिता के  अद्भुत सेतु  रहे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रोफेसर त्रिपाठी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है।         


पं. वागीश शास्त्री का योगदान अविस्मरणीयः मंत्री भूपेन्द्र सिंह

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने गहन शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि ग्राम बिलैया, खुरई के सपूत, पद्मश्री सम्मानित संस्कृत के विश्व प्रसिद्ध विद्वान तथा भाषाविद महामहोपाध्याय पं. श्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी (वागीश शास्त्री) जी के निधन की खबर अत्यंत दुखद है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि श्री भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी जी का जाना संस्कृत जगत ही नहीं, देश की अपूरणीय क्षति है।देश की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिकता के युग में भावी पीढ़ियों के हाथों सुरक्षित पहुंचाने में श्री भागीरथ त्रिपाठी जी का योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे। और शोक संतप्त परिजनों इस गहन दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। 

बनारस में बुंदेलखंड विकास परिषद ने दी श्रद्धांजलि

    ★ पुराना फोटो...वागीश जी के साथ परिषद के सदस्य 

वागेश जी के  निधन पर बनारस में बुंदेलखंड विकास परिषद और गौर परिवार के डॉ संजीव सराफ, डॉ विवेकानंद जैन, डॉ रामकुमार दांगी, डॉ नवल किशोर मिश्र, डॉ नीरज खरे, डॉ धर्मेंद्र मिश्र, डॉ सुरेंद्र जैन भदैनी, मनीष शास्त्री, प्रो कमलेश जैन, प्रो फूलचंद प्रेमी, डॉ आनंद जैन आदि ने उनके निधन को बुंदेलखंड के लिये अपूरणीय छति बताते हुए घाट और निवास पर पहुँच कर श्रद्धाजंलि अर्पित की।

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