जंय श्री गणेशाय नमः

मंगलवार, 14 सितंबर 2021

पीएससी के विबादित नियमो को चुनोती देने वाली 8 याचिकाओं की अगली एवं अंतिम सुनवाई 23 सितंबर

पीएससी के विबादित नियमो को चुनोती देने वाली 8 याचिकाओं की अगली एवं अंतिम सुनवाई 23 सितंबर

★दिनाँक 02 सितंबर के आदेश के परिपालन में,पीएससी नही कर सकी डेटा पेश 

★ पीएससी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार विबादित नियमो के सम्वन्ध में सकारात्मक निर्णय लेने वाली है 

जबलपुर।  पीएससी भर्ती परीक्षा 2019 एवं 2020 की वैधानिकता सहित परीक्षा नियम 2015 में किए गए संशोधन दिनाँक 17/2/2020 की सवैधनिकता को चुनोती दी गई है उक्त याचिकाओं में माननीय न्यायालय द्वारा दिनाँक 21 जनवरी 2021 को अंतरिम आदेश पारित कर पीएससी की सम्पूर्ण भर्ती प्रक्रिया को याचिका क्रमांक 807/2021 के निर्णयाधीन किया गया है। याचिकाओं में आज दिनाँक 14/09/2021 को माननीय मुख्य न्यायमूर्ति श्री मोहम्मद रफीक एवं विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ द्वारा की गई पीएससी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की विवादित नियम के संबंध में शासन स्तर पर कुछ सकारात्मक परिणाम के लिए कार्यवाही विचाराधीन है। माननीय न्यायालय द्वारा दिनाँक 2 सितंबर 2021 को दिए निर्देशों के परिपालन में चाहि गयी जानकारी एवं डेटा सोमवार तक प्रस्तुत कर दिया जाएगा। ज्ञातव्य हो कि न्यायालय द्वारा पीएससी से विगत परीक्षाओं में कितने आरक्षित श्रेणी के अभ्यार्थी अनारक्षित वर्ग में चयनीत हुए हैं के डेटा चाहे गए थे। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि दिनाँक 24 अगस्त 2021 को भोपाल में पिछड़ा वर्गों के समस्त संगठनों की सयुंक्त वैठक बुलाई गई थी जिसमे ओबीसी एडोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन सहित 18 संगठनों ने मुख्यमंत्री से 54 सूत्रीय मांग पत्र सौपते हुए आरक्षित वर्गों के हितों के विपरीत बनाए गए संशोधित नियमो को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई थी जिस पर माननीय मुख्यमंत्री ने उक्त मांग को प्रथम वरीयता देते हुए उक्त संषिधित नियम दिनाँक 17/2/2020 को निरस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे   इसलिए पीएससी का आज कोर्ट में दिया गया बयान इसी से संदर्भित माना जा रहा है । याचिका कर्ताओ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विवेक कृष्ण तन्खा, रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह तथा रामभजन लोधी ने पैरवी की पीएससी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प्रशांत सिंह तथा राज्य शासन की ओर से आशीष वर्नाड ने पक्ष रखा । याचिका क्रमांक 807 में पारित अंतरिम आदेश को जारी रखा गया ।

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